गुरुवार, 15 दिसंबर 2011

गोपाल राय team ANNA



गोपाल राय का जन्म 10 मई 1975 को ग्राम गोबरीडीह निकट सिपाह इब्राहिमाबाद बाजार थाना मधुबन जिला मऊ उ ण्प्र में एक किसान परिवार में हुआ। आप के पिता का नाम श्री विजयशकर राय तथा माता का नाम श्रीमति सत्यावती राय है। आपने गृह जनपद से ही प्रारंभिक सी क्षाए प्राइमरी पाठशला गोबरीडीह मीडिल  किसान लघु माध्यमिक विद्यालय मुरारपुर हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की शीक्षाए तरुण इंटर कालेज कुंडा कुचाई से प्राप्त की।

इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के पश्चाट  आईएएस अधिकारी बनने के सपने के साथ आप स्नातक के लिए इलाहाबाद विशविद्यालय में दाखिला लेकर पढ़ाई के साथ आईएएस की तैयारी में जुट गये।

 पर इसी दौरान 1992 में देष के अंदर चारो तरफ मन्दिर.मस्जिद तथा आरक्षणए समर्थन व विरोध के नाम पर शुरू हुई मानवीय कत्लेआम की घटनाओं तथा देश  की एकता के विखंडन के हालात ने आप के मन को इतना विचलित कर दिया कि आपने आईएएस बनने के सपने को तिलांजलि देकर आजीवन समाज व राश्ट्र की एकता के लिए काम करने का संकल्प ले लिया। इस संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए आप आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन के सक्रिय कार्यकर्ता बन गये।

संगठन के कार्यों को पूरे प्रदेश में गति देने के लिए स्नातक के पशचत आप लखनऊ पहुंचे तथा वहीं लखनऊ विशविद्यालय से परास्नातक की शीक्षा ग्रहण की। इस दौरान आप संगठन के प्रदेश महासचिव तथा राश्ट्रीय पार्शद चुने गये।

 पूरे प्रदेश में दगा नहीं रोजगार चाहिए जीने का अधिकार चाहिए आंदोलन तेज हुआ। आंदोलन के दौरान कई बार जेल गये। आंदोलन के साथ आपने त्रसंघ है छात्रों का.गुण्डों की जागीर र नहीं के आवाहन के साथ  छात्रसंघ अध्यक्ष के चुनाव में भी हिस्सेदारी की।

बाद में इस संगठन से मतभेद बढ़ने पर अलग होकर भारतीय छात्रसंघ की स्थापना किये तथा इसके राश्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी को सम्भालने लगे। परास्नातक के पशत कानून की षिक्षा भी लखनऊ विशविद्यालय से ही प्रारंभ की।

1997 में समाज व राश्ट्र की एकता के लिए काम करने के साथ ही आपने विशव् विद्यालय में मंहगी शीक्षाए बढ़ते अपराधीकरणए पढ़नेवाले छात्रों को छात्रावासों में गुण्डों द्वारा जबरदस्ती परेशन किये जाने तथा बढ़ते भ्रश्टाचार के खिलाफ आम छात्रों के साथ मिलकर आंदोलन प्रारंभ किया। ज्ञापन धरनाए प्रदर्षन के पष्चात भी कोई कार्यवाही न होने पर छात्रों के साथ आप आमरण अनशन पर बैठ गये।

 एक सप्ताह तक चले अनशन के पष्चात सरकार को झुकना पड़ाए 14 अपराधियों को विष्वविद्यालय से निश्कासित किया गया तथा कुलपति को हटाकर भ्रश्टाचार की जांच प्रारंभ हुई। आंदोलन की जीत से छात्रों के अंदर खुशी  की लहर दौड़ पड़ी लेकिन इसके लिए आप की जिंदगी दाव पर लग गयी।

हार से बौखलाये भ्रश्टाचारियों व अपराधियों के गिरोह ने आपको जान से मारने की योजना बना ली। 18 जनवरी 1999 को आपको धोखे से गर्दन में गोली मारी गयी। गोली रीढ़ की हड्डी आकर फंस गयी। आप जिंदा तो बचे मगर गर्दन के नीचे का हिस्सा पूरी तरह निश्क्रीय हो गया मानो जिंदा लाष।

लखनऊ मेडिकल कालेज में महीनों चले इलाज के पष्चात सुधार की धीमी गति को देखकर डाक्टरों ने इन्हे  घर लेजाकर एक्सरसाइज कराने की सलाह दी। इसके पष्चात आपको लखनऊ से गांव लाया गया। गांव में कई महींनों चली एक्सरसाइज के पष्चात स्वास्थ्य में सुधार होने लगा। स्वास्थ्य में कुछ सुधार होते ही मन में समाज के लिए जीने की भावना प्रबल हो उठी।

बिस्तर पर पड़े.पड़े ही आपने सिपाह बाजार से मझवारा जाने वाली 8 किमी  खराब सड़क से हजारों लोगों की दुर्दषा को देखकर सड़क निर्माण के लिए जनसंघर्श का संचालन प्रारंभ कर दिया। गांव से लेकर मऊ आजमगढ़ व लखनऊ तक चले अभियान के पष्चात अंततोगत्वा सड़क का निर्माण हुआ। शयद जिले की यह अकेली पिच सड़क होगी जिसे जनसंघर्श की बदौलत बनाया गया।

न सिर्फ ग्रामीण विकास बल्कि सामाजिक एकता की भावना भरने के लिए आजादी की लड़ाई में  15 अगस्त 1942 को कुर्बानी देने वाले मऊ जिले स्थित मधुबन के षहीदों की साझी शहादत.साझी विरासत की याद को पुनर्जीवित करने की मुहिम को तेज किया। इतना ही नहीं मधुबन के शहीदों की सरकारी सूची में से भी प्रषासनिक लापरवाही के कारण छोड़ दिये गये दो शहीदों के नाम को बाजार स्थित स्मारक शीलापट्ट पर दर्ज कराने के लिए संघर्श कियाए फिर भी जब प्रशसन के कान में जूं नहीं रेगीं तो स्वयं जनता के सहयोग से वर्शो से उपेक्षित शहीदों का नाम स्मारक शीलापट्ट पर लिखवा दिया।

मऊ जिले की यह विडंबना है कि पूरे पूर्वांचल में काफी विकास के शोर के बीच इस जिले के शैक्षणिक पिछड़ेपन की बात दब गयीए जबकि सच्चाई यह है कि जिले में विज्ञान कामर्स कानून कृशि इंजीनियरिंग मेडिकल मैनेजमैंट कम्प्युटर आदि की शीक्षा के लिए कोई सरकारी संस्थान नहीं है जिसमें गरीब किसान के बेटे.बेटियां पढ़कर अपना भविश्य सुधार सकें।

बीच में समाज के लिए संघर्श के साथ अपने स्वास्थ्य को ठीक करने की चुनौती भी हर समय मौजूद थी। स्वास्थ्य में सुधार तो हो रहा था पर दूसरे के सहारे के बगैर कुछ भी करना मुष्किल था। आप पुनः स्वास्थ्य सुधार के लिए लखनऊ पहुचें। वहां लम्बे समय तक आयुर्वेद कालेज में भर्ती होकर इलाज कराया। वहां से दिल्ली में एम्स मडिकल संस्थान पहुचें और वहां से केरल में जाकर आयुर्वेद संस्थान में पंचकर्म चिकित्सा का सहारा लिया।

 7 वर्शों तक इलाज के पष्चात भी पूरी तरह सुधार नहीं हो सका। गर्दन में आज भी गोली फॅंसी हुई है।
स्वास्थ्य में कुछ सुधार होने के पष्चात आपने 2002 से युवा भारत के साथ जुड़कर युवा आंदोलन को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।

2007 में 1857 की पहली जंगे आजादी की 150 वीं वर्शगांठ तथा शहीद भगत सिंह के जन्म सदी के अवसर पर राश्ट्रीय कार्यक्रम की तैयारी के लिए दिल्ली पहुंचने पर जब पता चला कि हमारी सरकार हर 26 जनवरी व 15 अगस्त को जिस इंडिया गेट पर सलामी देती है उस पर हमारे आजादी के शहीदों का एक भी नाम नहीं है तो आपने शरीर के दुःख दर्द को दरकिनार करके अधूरी शरीर को लेकर ही मधुबन से शुरू हुए शहीदों के सम्मान व उनके अरमान को पूरा करने की लड़ाई को पूरे देश के शहीदों के सम्मान व उनके पूर्ण आजादी के अरमानों को पूरा करने के लिए 31 मई 2007 को दिल्ली लालकिले के दीवान.ए.आम में अपने साथियों के साथ मिलकर तीसरा स्वाधीनता आंदोलन की स्थापना किया।

शहीदों के अपमान के खिलाफ आपने 9 अगस्त 2009 से 23 अगस्त 2009 तक तीसरा स्वाधीनता आंदोलन के बैनर तले संसद भवन के पास दिल्ली में जंतर.मंतर पर 15 दिनों तक अनशन किया। आपने देश  के 15 राज्यों में यात्रा किया जिसमें अब तक 12 राज्यों में तीसरा स्वाधीनता आंदोलन की शुरुआत हो चुकी है।

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